विज्ञापनी हथकंडा और मजहबी वसुली

इन दिनो मे मीडीया मे दिखाये जानेवाले विज्ञापनो पर मै विचार कर रहा था. इनपर विचार करते समय एक बात पर मेरा ध्यान गया कि ये विज्ञापन देनेवाली कम्पनीया अपनी कमजोरी जानती है. इसलीये ये अपनी कमजोरी को छिपाने के लीये उसी से उलटा विज्ञापन करते है. लोग दिये गये विज्ञापनो पर अंधे कि नाइ भरोसा करते है और सोचते है कि विग्यापन दिये हुये शेत्र मे इन कम्पनीयो को महारत हासील है; किंतु सच्चाइ यह होती है कि यह इनकी दुखती रग होती है.

टि.पि.एम भी अपनी कमजोरीयो को विज्ञापनो के जरीये छिपाने का प्रयास करता

टि.पि.एम का किस्सा भी कुछ ऐसा ही है. वे बडी चतुराइ के साथ अपने आप को वह दर्शाते है जो वे है नही. यदि आप इस वेबसाइट के नियमीत पाठक है तो आप जानते है कि ये लोग जीतने संत होने का दावा करते उतनी संतगीरी इनमे है नही. जीस प्रेरीताइ का ये दावा करते वैस प्रेरीत ये है नही. इनकी सफेद पोशाक इनके अंद्रुनी अंधीयारे को ढाकने के लीये होती है. हमने इस लेख को इनके विश्वास जीवन के दावे कि खोक्लीयत दर्शाने के लीये लीखा है. “विश्वास-घर” इस शब्द का प्रयोग करके जीस विश्वास जीवन का ये दिखावा करते है (विज्ञापन करते है), उसकी असलीयत आपको बताने को मैंने ये लेख लीखा है. ये अपने निवास के स्थान को फेथहोम कहते है लेकीन वास्तवीकता मे ये फेक होम (फेक का अर्थ नकली) होता है.  ये अपने जीवन शैली को फेथ लाइफ (विश्वास जीवन) कहते है लेकीन वास्त्वीकता मे यह फेक लाइफ होती है. लुका 19 अध्याय मे हम पढते है कि जक्कइ को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि यीशु उसके घर मे आये. फिर जब यीशु उसके घर गये तो लोगो का कुडकुडाना इतना बढ गया कि कुडकुडाहट जक्कई ने भी सुन ली (लुका 19:7).  येशु के दैवीय सम्मुख ने जक्कइ के जीवने मे सच्चे पशचताप को ले आया और उसने सबके सामने ये कबुल किया “हे प्रभु, देख मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूं, और यदि किसी का कुछ भी अन्याय करके ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूं (लुका 19:8).”

मजहबी वसुली

जक्कइ के जीवन कि तुलना यदि टि.पि.एम के संतो से करी जाये तो हालात दयनीय है. दुख कि बात है कि सिय्योन के यात्रीयो को (टि.पि.एम के सेवक) वैसा विवेक नही जैसा जक्कइ को था. पहली बात तो इनके साथ कोइ दैवीय सम्मुख नही. यदि इन्हे यीशु के सम्मुख से अपने गलतीयो का बोध होता तो ये अवश्य जक्कइ कि तरह अपनी गलती मान लेते और उसे सुधार भी देते. टि.पि.एम मे ऐसे बहुत से चुंगी वसुल करनेवाले है, जो जमीने खरीदने और बडे-बडे घर बनाने के लीये लोगो से पैसा वसुली करते है. जक्कइ भी कैसर के नाम से लोग़ो को डराकर पसे ऐठने कि तकनीक का इस्तेमाल करता था. टि.पि.एम के लोग परमेश्वर के नाम से लोगो से पसा ऐठते है. इन मजहबी वसुली करनेवालो के सामने दाउद इब्राहीम संत दिखाइ पडेंगा.

मजहबी वसुली का नमुना

एक किस्सा मुझे याद आता है. मुझे इसकी अस्लीयत साबीत करने के लीय नाम लेना पडेंगा. फ्रांसीस (बीज्जु) नामक एक सेवक है. उसने धारीवल सेंटर के बटाला मे जमीन का सौदा किया. इस पैसे को चुकाने के लीये उसने हर विश्वासी परीवार से अमुख-अमुख रक्कम अदा करने को कहा. विश्वासीयो कि आर्थीक दशा के अनुसार किसी को 50 हजार तो किसी को 25 हजार और किसी को और उची रक्कम. ऐसा सुनाइ आया है कि कुछ लोगो ने फेथहोम कि जमीन खरीदने के लीये उधार से पैसे लीये थे. यदि लोग पैसे न दे परमेश्वर नाराज हो जाएंगा और उन्हे श्राप डेंगा ऐसा कहकर लोगो को डाराय गया. टि.पि.एम के सेवको कि ऐसी हरकतो के विश्य हम क्या कहे? क्योकि सफेद कपडा पहीने टि.पि.एम का दास ऐसे काम करता है इसलीये क्या हम इसे परमेश्वर के द्वारा ठराइ विधी कहे? समझदार लोग मान लेंगे कि यह तो जबरन वसुली है. इस जबरन वसूली के लीये ये प्रेरीत 5 का इस्तेमाल करते है, जीसमे हन्न्याह और सफीरा मर गये थे. ये लोग इस वचन को ऐसे मोडते है जैसे कि हन्न्याह और सफीरा अपने हिस्से कि किश्त न चुकाने के कारान मरे थे.

टि.पि.एम के नये आकश मे रहनेवाले लोगो से तुलना 

मुसा के समय भी कभी ऐसी करतुत न हुई थी. जब परमेश्वर ने मुसा को मिलाप वाला तम्बु बनाने को कहा था तो उसने उसे क्या आज्ञा दि थी?

“तुम्हारे पास से यहोवा के लिये भेंट ली जाए,  अर्थात जितने अपनी इच्छा से देना चाहें वे यहोवा की भेंट करके ये वस्तुएं ले आएं;  अर्थात सोना, रूपा, पीतल  (निर्ग 35:5).”  मुसा ने इन टि.पि.एम के सेवको कि नाइ लोगो पर बोझ और भार नही डाला कि भीख मांगो, उद्धार लो या चोरी करो, पर मुझे तम्बु बनाने का सामान चाहीये. प्रेरीतो कि सिद्धता कि सेवा करनेवाले इन सेवको के द्वारा लोगो को उद्धार के श्राप मे डालना इतने दुख कि बात है. “..तू बहुतेरी जातियों को उधार देगा, परन्तु किसी से तुझे उधार लेना न पड़ेगा (व्यव 28:12).” लोगो को श्राप से छुटकारा दिलाने के बदले यदि ये सेवक लोगो को उधार के श्राप के अधीन ले आये तो यह क्या ही अभागी अवस्था होंगी?  ऐसे कामो को आप सही कैसे ठहराओंगे? ये अगुवे लोग ऐसे मजहबी वसुलकर्ताओ के तरफ आख से अंधे हो जाते और कान से बहीरे.

इन बातो मे प्रधान सेवको कि भुमीका संदेश्स्पद है. ये लोग ऐसे पैसे ऐठने के किस्सो के प्रती अन्धे होकर और बहीरे होकर दिखाइ पडते है.

क्या सिय्योन मे मेमने के साथ खडे रहनेवाले ये टि.पि.एम के सेवक पुराने नियम के शमुयेल और नये नियम के संत पौलुस के सामने खडे रह सकते? शमुएल और पौलूस ने कभी  जोर जबर्दस्ती नही कि. शमुएल कहता है की “मैं उपस्थित हूं;  इसलिये तुम यहोवा के साम्हने, और उसके अभिषिक्त के सामने मुझ पर साक्षी दो, कि मैं ने किस का बैल ले लिया? वा किस का गदहा ले लियो? वा किस पर अन्धेर किया? वा किस को पीसा? वा किस के हाथ से अपनी आंखें बन्द करने के लिये घूस लिया? बताओ, और मैं वह तुम को फेर दूंगा (1 शमु 12:3).” कितने टि.पि.एम के सेवक ऐसे चुनौतीपुर्ण बात कह सकते है? धर्मी परमेश्वर सिय्योन के उचे स्थान को शमुयेल के बदले मे टि.पि.एम के इन वसुली करनेवाले गुंडो को क्या सीर्फ इसलीये देंगा क्योकि इन्होने शादि नही की? कदापि नही! परमेश्वर अधर्मी नही कि वो ऐसे सुंदर चरीत्र वाले शमुयेल के बदले ये स्थान इन टि.पि.एम के ठगी लोगो को देंगा, जो खोकले दावे करते और निरर्थक प्रतीश्ठा का डंका मारते फिरते है. न्याय के दिन प्रतीष्ठा से ज्यादा चरीत्र को पुरुस्कृत किया जायेंगा. “देख,  मैं शीघ्र आने वाला हूं; और हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है (प्रका 22:12).” शमुयेल की तरह हमारे पास पौलुस का उदाहरण भी है.  प्रेरीत 20:33,34 मे वह कहता है कि  “मैं ने किसी की चान्दी सोने या कपड़े का लालच नहीं किया. तुम आप ही जानते हो कि इन्हीं हाथों ने मेरी और मेरे साथियों की आवश्यकताएं पूरी कीं (प्रका 20:33-34).” संत पौलुस ने अपने हाथो से अपनी जरुरत को पुरा किया. टि.पि.एम के सेवको मे कौन ऐसी बात कह सकता है?

सडाहट कि गहराइ – ये बु मारती है

तकरीबन सभी के सभी जमीन खरीदने और विश्वास घर बनाने कि आत्मा से मतवाले हो चले है. ये लोग सारी सुवीधाओ को लुफ्त उठाते और कहते है कि हम त्याग का जीवन जी रहे. अपने हाथो से काम करना तो बहुत दुर कि बात है. यदि ये लोग किसी गरीब को एक वक्त कि रोटी और तन ढकने को कपडा भी दे तो हम इनकी सरहाना करेंगे. किंतु इस बात को नकारा नही जा सकता कि यह असम्भव से भी असम्भव बात है क्योकि इन्हे ऐशो आराम से रहने कि आदत पडी है. ये आलसी पेट्टु टि.पि.एम के सेवक परमेश्वर कि नज़र मे घृणीत है.

इन टि.पि.एम के सेवको कि ऐशो आराम कि चाहत तकरीबन सारे कनवेंशन ने दिखाइ पडती है. कनवेंशन मे भाग लेनेवाली आम जनता के लीये गीनी चुने या न के बराबर पंखे होते है किन्तु संत बैठनेवाले स्टेज पर पंखो कि भरमार होती है. कुछ संत तो अपने लीये खुद का पंखा भी ले आते है. ये संत आम जनता को साधरण पानी देते है, किन्तु सवय बोतल बंद मीनरल वाटर का इस्तेमाल करते है. इन सारी सुवीधा का स्तोत्र क्या है? क्या ये लोग इन पंखो और मिनरल वाटर को विश्वासीयो के दिये दस्वांश और दान से नही खरीदते? ये वो सेवक है जो अपने आप को मेमने के पीछे हो लेनेवाले परमेश्वर के सच्चे दास कहते. क्या यीशु ने ऐशो आराम कि सुवीधाओ का इस्तेमाल किया? नही! 2 कुरींथी 8:9 मे पौलुस कहता कि यीशु कंगाल बना कि हम धनी बन जाय. किंतु हाय! टि.पि.एम के सेवक गरीब को कंगाल बना देते और खुद धनी बन जाते. 2 कुरंथी 4:12 मे संत पौलुस कहता है कि “सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर.” क्या खुद को प्रेरीतो कि सेवा करनेवाला बतलानेवाले टि.पि.एम के सेवक शुद्ध विवेक के साथ ऐसा बोल सकते है?

उपर दि तस्वीर को देखे. एक मित्र ने यह वाट्सएप पर हमारे साथ शेयर कि. “अल्वाये” स्थान की कलीसीया कि नइ बिलडींग हमे इनके त्याग जीवन का दर्शन कराती है. अदभुत! ये इतने प्रतीष्ठीत है कि जमीन पर नीचे गाडी खडी करना इनके लीये कठीन आम है, इसलीये कार को सीधे पहीले माले पर अपने रुम के सामने पार्क करवाते. इनके प्रतीश्ठीत बलीदानी जीवन को देखकर परमेश्वर को भी हसी आती होंगी. भला होता कि टि.पि.एम के सेवक और विश्वासी मिका 6:8 पढते, “हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले ? ” विशाल सुख सुवीधाओ वाली बिलडींग बनाकर उसका नाम फेथहोम रखने के बजाय टि.पि.एम को चाहीये कि गरीबो के लीये छत, भोजन और कपडो का इंतजाम करने कि कृपा दिखाते!

निश्कर्ष:

जक्काइ कि मुलाकात यीशु से हुइ और उसने तुरन निर्णय किया कि वह आपनी आधी सम्पत्ती गरीबो मे बाट देंगा. मुझे नही पता इन टि.पि.एम के सेवको को नित्यता मे कौनता स्थान मिलेंगा. किंतु ये पक्का है कि सिय्योन और नया यरुशलेम नही! अपनी आधी समप्त्ती गरीबो मे बाटनेवाले जक्काइ को यदि टि.पि.एम के उपदेश के अनुसार सिय्योन नही मिलेंगा, तो फिर इन टि.पि.एम के संतो को कौनता स्थान मिलेंगा?

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*