टि.पि.एम मे एमवे दुकानदारी और अन्यजातीयो कि सी चाल

अब तक आप टि.पि.एम कि चालबाजीयो से परीचीत हो चुके होंगे।  ये चालबाजीया दुनीया के सारे टि.पि.एम फेथहोम मे इस्तेमाल कि जाती है। किंतु कुछ चालाबाजीया थोडी भीन्न होती है। इन भीन्न चालबाजीयो का और इन्हे इस्तेमाल करनेवालो का भांडा फोड करना अनीवार्य है। टि.पि.एम के नेता इस तरह कि भीन्न चालबाजीया को नजरंदाज करते है।

सबसे पहले मै उन चालबाजीयो को बेनकाब करुंगा जीसे अनेक टि.पि.एम के सेवको अपनी खुद कि महीमा करवाने के लीये इस्तेमाल करते है। ये लोग भोले नवयुवक/ युवतीयो को सेवा मे जाने के लीये अपने शब्दो से फसाते है, इसलीये नही कि लोग सेवा मे आये, किंतु इसलीये कि इनके नेताओ कि नजर मे ये अपनी उन्नत्ती करवा सके। अपनी उन्नती के लीये सेवक आपस मे प्रतीस्पर्धा मे रहते है। ये लोग सेवा का झांसा बच्चो को इसलीये देते कि नेताओ कि नज़र मे इनका नाम हो – कि इसके कार्यअवधी मे इतने-इतने लोग सेवा मे आये।

एमवे दुकानदारी तकनीक

पास्टर श्याम सुंदर

ऐसा ही एक व्यकती नागपुर सेंटर पास्टर श्याम सुंदर है। ये प्रतीस्पर्धा के शेत्र सबसे आगे है। ये चाहता है कि इसका नाम और इसकी किर्ती के चर्चे टि.पि.एम के नेताओ कि किताब मे दर्ज किये जाये। अपने इस गन्दी योजना को अंजाम देने के लीये, ये अपने अधीकार के शेत्र मे नही आने वाले लोगो को चुराकर, उन्हे अपने शेत्र मे ले जाता है कि नये बच्चे इसके शेत्र से सेवा मे जाये (ताकि इसका नाम हो)। एक ऐसे ही किस्से को मै आपके सामने पेश करता हु। दो साल बरोडा मे सेंटर पास्टर रहने के बाद इसका तबादला नागपुर मे हुआ। बरोडा मे शमुयेल नामक युवक विश्वासी था। श्याम सुंदर ने इस लडके कि नौकरी छुडवाकर उसे अपने साथ नागपुर ले गया और फिर अगले साल चेन्नइ मे इसे सेवा मे भेज दिया। दो साल के उपरांत इसका ट्रांसफर नइ दिल्ली मे हुआ। वहा इस लडके ने लोगो कि नाक मे दम मचा दिया। इसे देख टि.पि.एम के बडे नेताओ ने इसको दिल्ली से उठाकर, इसे इसके बोरीये बिस्तरे सहीत वापस नागपुर भेज दिया, जहा से यह सेवा मे आया था। अब इसका जीवन बर्बाद हो गया। इसका जीम्मेदार कौन है?  अपने किर्ती कि गाथा मे एक नया सितारा जोडने के चक्कर मे पास्टर श्याम सुंदर ने इस लडके शमुयेल का जीवन बर्बाद कर दिया। क्या यीशु ने नही कहा “ हे कपटी शास्त्रियों और फरीसियों तुम पर हाय! तुम एक जन को अपने मत में लाने के लिये सारे जल और थल में फिरते हो,  और जब वह मत में आ जाता है,  तो उसे अपने से दूना नारकीय बना देते हो (मत्ती 23:15)।”

टि.पि.एम कि आत्मीकता कि उचाइ

चिपकली और बिल्ली

यदि आप नागपुर मे रहते हो, तो सिय्योन कि उडान भरने के नये तरीके को जानने के लीये वहा कि एक मिटींग मे भाग लेकर देखीये। मेरी नज़र मे श्याम सुंदर एक स्वय धर्मी व्यकती है, जो खुद कि सादगी से भरी जीवन शैली का खुब जोरो शोरो से ऐलान करता है। कुछ गलत होने पर ये सारा इल्जाम दुसरो के मत्थे मारता है, किंतु कुछ अच्छा होनेपर सारा श्रय लेने कि एक अवसर भी अपने हाथ से जाने नही देता। एक सच्चे अगुवे कि निशानी है कि वह सारी गलतीयो के लीये स्वय को जिम्मेदार ठहराता है और भली बातो का श्रेय अपने सहकर्मीयो को देता है। पास्टर श्याम को जादु टोने और तंत्र-मंत्र से बहुत डर लगता है। यदि ये एक चिपकल्ली को कही देखे ले तो उसे मारे बगैर इसके जी मे जी नही आता। जानते हो क्यो? क्योकि ये अंधविश्वासी है और इसका मानना है कि बिल्लीया और चिपकल्लीयो को जादुगर इसकी निगरानी करने के लीये भेजते है। आपको हसी आ रही होंगी। प्रेरीत यहुन्ना ने कहा “प्रेम में भय नहीं होता,  वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ (1 यहुन्ना 4:18). यदि किसीमे सिद्ध प्रेम हो तो वह जादुगरो से और दुष्टआत्मा से डरेंगा नही क्योकि सिद्ध प्रेम पवीत्र आत्मा के द्वारा उंडेला जाता है (रोमी 5:5)। यदि श्याम सुंदर को पवीत्र आत्मा मीली है तो उसे डर क्यो लगता?  प्रिय पाठक,  क्या इस तरह के सेवक आपको सिद्धता तक ले जायेंगे? जो लोग खुद सिद्ध नही वे आपको सिद्ध बनायेंगे ऐसे धोके मे आप कब तक रहोंगे? आप बहार क्यो नही निकलते? कब तक झुलते रहोंगे?

भुतप्रेत से बाते करनेवाली स्त्री

हम जानते है कि रोमीयो 8:14 मे लीखा है कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं,  वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं। अब आप बताये कि पास्टर श्याम सुंदर को पवीत्र आत्मा कि चलाहट है कि नही? इनको सुझाव देने के लीये ये कुछ गीने चुने सेवक सीस्टरो का इस्तेमाल करते है। इनमे से प्रमुख मुंबइ सेंटर कि सीस्टर श्रद्धा है। ये सीस्टर श्याम सुंदर को सुझवे देती है और इस तरह से यह श्याम सुंदर का नाटक चलाती है। किसी को प्रार्थना करने को कहना सही नही ऐसा मै नही कह रहा, किंतु श्याम सुदंर इन सीस्टरो पर अवश्यकता से अधीक निर्भर रहता। जीस दिन कनवेन्शन मे प्रचार करने कि इसकी बारी होती उस दिन यह इनको फोन कर इन्हे पुरा दिन उपवास लेने को कहता। ऐसा अनुमान है कि अपने सेंटर मे सेवको का ट्रांस्फर भी इस सीस्टर को पुछ कर करता है। क्या पवीत्र आत्मा सीर्फ सीस्टर श्रद्धा के द्वारा ही काम करता?  क्या पवीत्र आत्मा श्याम सुंदर कि अगुवाइ नही करता? इस्रायेल के पहले राजा शमुयेल मे जीसने भुतप्रेत से बाते करनेवाली स्त्री को पुकरा था, उसमे और श्याम सुंदर से क्या फरक है?

एक बार एक दर्शन देखनेवाली सीस्टर ने श्याम सुंदर को बताया कि ये सोनेवाले लकडी के पलंग मे शैतान छीप कर बैठा है। अंधविश्वासी ने उस पलंग को उठवाकर नागपुर के कनवेंशन ग्राउंड के कुये मे फिकवाकर उस कुये को पत्थरो और मिट्टी से भर दिया, कि शैतान बहार न निकलने पाये।

दिनो को मानना

बाइबल को नियत दिनो को मानने से मनाइ करता है. पर अब जो तुम ने परमेश्वर को पहचान लिया वरन परमेश्वर ने तुम को पहचाना, तो उन निर्बल और निकम्मी आदि-शिक्षा की बातों की ओर क्यों फिरते हो, जिन के तुम दोबारा दास होना चाहते हो? तुम दिनों और महीनों और नियत समयों और वर्षों को मानते हो. संत पौलुस के अनुसार जो लोग दिन,  महीने और नियत समय को मानते है वे निर्बल और निकम्मी बातो के दास है (गलातीयो 4:9,10). विश्वसनीय स्तोत्रो के अनुसर मीली जानकारी से हमे पता चला है कि श्याम सुंदर अमावस्या और पुर्नीमा को मानता है। इस दिन ये उपवास के नाम कि आड मे अपने रुम मे बंद हो जाता है। इन्हे लगता कि इस दिन शैतान इनपर आक्रमण करता है। मै उपवास कि खिलाफ नही किंतु मेरा सवाल है कि ये विशीष्ट दिन को ही उपवास क्यो लेते?

निश्कर्श

टि.पि.एम के कट्टरपंथी प्रियजनो, आप श्याम सुंदर को महान संत मानते हो किंतु अपने आप से पुछ कर देखो कि आपका संत ऐसी उट्पटांग कार्यो मे क्यो व्यस्त रहता? ऐसी बातो कि दासत्व मे जीनेवाले आपको कैसे दास्त्व से छुटकारा देंगे या फिर आपको कैसे सिद्ध बनायेंगे? इस लेख को लीखनेवाला मै आपसे आग्रह करता हु कि श्याम सुंदर कि तरह बंधनो से जकडे सेवको कि संस्था से आप बहार निकल आये. जल्दी करे! टालम टोल न करे! अपने जीवन कि लेकर भागे.

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