टि.पि.एम डाकुओ के पलने बढने कि खोह

यीशु ने परमेश्वर के मन्दिर में जाकर, उन सब को, जो मन्दिर में लेन देन कर रहे थे, निकाल दिया; और सर्राफों के पीढ़े और कबूतरों के बेचने वालों की चौकियां उलट दीं. और उन से कहा, लिखा है, कि मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा; परन्तु तुम उसे डाकुओं की खोह बनाते हो.  मत्ती 21:12-14

जैसे यीशु ने किया, वैसे ही हम भी आक्षरीक रुप मे टि.पि.एम के साथ ऐसा ही करना चाहते है, किंतु पहले हम डिजीटल तरीके से शुरु करेंगे. टि.पि.एम पैसो बनाने का एक व्यापार है किंतु यह काम ये जटील धुर्त तरीके से करते है.

अपने अपको सच्ची कलीसीया ठहरानेवाले टि.पि.एम मे पाये जानेवाले विभीन्न तरीके के लालच पर प्रकाश डालने के लीये हम इस लेख को लीख रहे है. अंदरुणी व्यकती होने के नाते, इस संस्था कि भ्रष्टता कि गहराइ बताने के लीये मै आपके सामने कुछ उदाहरणो को पेश करुंगा. क्योंकि रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए कितनों ने विश्वास से भटक कर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है (1 तिमुथी 6:10).

चुना लीपी कब्रे

हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय;  तुम चूना फिरी हुई कब्रों के समान हो जो ऊपर से तो सुन्दर दिखाई देती हैं, परन्तु भीतर मुर्दों की हिड्डयों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं.  मत्ती 23:27

टि.पि.एम के सेवक जो दैवीय चंगाइ और ब्रमहचारीता पर खुप जोर देते वे रुपये के लोभ कि बंधन मे है जो सारी बुराइयो कि जड है. टि.पि.एम उन गीनी चुनी संस्थाओ मे से एक है जीन्हे बहुत बडी मात्रा मे रुपये दान मे मिलते है. अनेक नादान विश्वासी जो यह सोचते है कि और दान देने से उन्हे आशीशे मिलती है, वो विश्वासयग्यता से पादरी वर्ग को दान देते है. ये लोग नही जानते कि हमारी आशीशे यीशु के द्वारा हमे परमेश्वर से प्राप्त होती है, दस्वांश देने से नही. इसलीये ये अपने सेवको पर भरोसा करते है और उनकी जेबो को भर देते. इनको ये विश्वास दिलाया जाता है कि सेवक इनके लीये सुबह और रात को परमेश्वर के सामने दुआ प्रार्थना करते है. दुख कि बात है कि सेवक भी पैसो कि खातीर परमेश्वर और अपनी कलीसीया के सदस्य कि दलाली करते है. अनजान विश्वासी नही जानते कि अधीकंश फेथो मे स्तुती और प्रार्थना का समय सेवको के ढुलकी लेने का समय है.

मैंने एक एल्डर ब्रदर के बारे मे सुना है कि वह 9 से लेकर 10 बजे तक सोता है. एक रवीवार को यह गीत खतम होने तक सोता रहा. जब ब्रदर दिखाइ नही दिया तो एक विश्वासी उठकर ब्रदर के कमरे के पास जाकर उसने खिडकी से अंदर झाका तो देखा कि बरदर खर्राटे मारके सो रहा है. विश्वासी ने उसे जगाया और ब्रदर तुरंत तैयार होकर सीधा प्रचार मंच पर पहुच गया. कलपना करके देख लो कि उसने कैसे प्रचार किया होंगा. ये तो आपके जानकारी के लीये सीर्फ एक उदाहरण है. कितनो के बारे मे पता ही नही. कितनी सेवक सीस्टर्स स्तुती और प्रार्थना मे सोयी रहती किंतु विसीटींग के लीये ये उतसाहीत रहती. आपको लगता होंगा कि वे विश्वासीयो के बारे मे कितनी चिंता करते. नही! ये सीर्फ पैसा जमा करने का इनका नियमीत काम है.

डाकुओ कि खोह मे होनेवाले कुछ और कृत्य

कुछ लोग सोच रहे होंगे कि मै टि.पि.एम के सेवको कि गलतीयो को क्यो पकड रहा हु. सच बोलु तो मुझे यह काम करने मे कोइ मजा नही मील रहा किंतु मै यह काम बहुत से गरीब विश्वासी को आगाह करने के लीये कर रहा हु. मै उन्हे जताना चाहता हु कि जीनपर वे अंधे के समान विश्वास करते है वे इनको कैसे धोका देते है. आपकी जानकारी के लीये मेरे अपने अनुभव से मै आपको कुछ और किस्से बताउंगा.

ये किस्सा के सेंटर पास्टर से सम्बंधीत है. उसकी नाक बचाने के लीये मै उसका नाम नही लेता. ये सेन्टर पास्टर अपने सेवको को ज्यादा पैसो कि मांग करता कि जो ज्यादा पसे देंगा उसे वह बडी सभा मे रखेंगा. एक सीस्टर ने उसे 10.000 रुपये दि कि उसे वह उसकी पसंद का सेवक ब्रदर दे. क्या आप विश्वास कर सकते है? आप देश मे फैली भ्रष्टता शिकायत करते किंतु आपकी संस्था मे फैली भ्रष्टता के विशय क्या? क्या आप जांते है कि वह अपने सेवको से अधीक पैसे कि मांग क्यो करता था? क्योकि उसका कहना था कि यदि वह अधीक पैसा हेडक्वार्टर भेजेंगा तो उसे बडे सेंटर मे रखेंगे. क्या यह लालच नही? स्थान और पैसो का लालच. मै आशा करता हु कि आपके समय मे आगया होंगा कि कैसे चीफ पास्टर से लेकर नीचे तक इस पुरी संस्था को भ्रष्टता के किडे ने कैसे खा लीया है.

ये एक और सेंटर पास्टर से सबंधीत है (अब दक्षीण भारत मे). सेवको कि मीटींग के बाद यह पास्टर लोकल सेवको के हाथ मे खाली लीफाफे थमाता था और उसपर एक रकम को लीख देता था. वह अपेक्षा करता था कि अगली मीटींग़ से पहले लीखी गइ रकम को लीफाफे मे रखकर सेवक उसे लीफाफा लौटा दे. क्या यह हफता वसुली नही ? इन सब बातो कि क्या जरुरत और ऐसे कामो को हम क्या कहे?

मजहबी पैसा वसुली. दाउद इब्राहीम मजहबी पोशाक मे

एक म्रुतक सेंटर मदर के मरने के बाद उसकी दो-तीन पेटी पैसो से भरी थी. 2 सेवक सीस्टर्स को पैसे गीनने को तीन दिन लग गये. इतना पैसा जमा करने का कारण क्या था? ये पैसा सीर्फ अमीर विश्वासीयो का दान और दस्वांश नही था बल्कि यह अनेक गरीबो का भी दान था. बेचार गरीब विश्वासी इन लालची सेवको को दान देते और खुद तंगी मे जीते. जैसे मैंने पहले कहा कि ये तो सीर्फ चंद उदाहरण है. इस भ्रष्ट संसथा मे यदि आप मेरी तरह सेवक होंगे तो आपको और भी सडी बाते देखने को मिलेंगी.

आप देनेवाले दान और दस्वांश के साथ क्या होता है? फेथ होम के नाम पर आपने भव्य आलीशान इमारतो को देखा होंगा, विशेष कर कनवेन्शन होनेवाली जगह पर. ये सारी बिल्डींग साल मे एक से दो बार इस्तेमाल कि जाती है. बाकि के दिनो मे तालबंद कि जाती. कितने गरीब विश्वासीयो के घर कि छत से बारीश के दिनो मे पानी टपकता और इन प्रतीष्ठित सेवको के पास इन टपक्ती छत तक कि मरम्मत करने का मन नही होता. घर बनाकर देना तो दुर कि बात है और थोडा पैस देना भी न हो तो क्या ये लोग इन गरीब लोगो को इन्ही के दान से बनी इन विशाल भवय इमारत मे रहने कि अनुमती देंगे? गरीब विशासी कि लीये कोइ स्थान नही किंतु पैसा देनेवाले अमीर विश्वासी इनमे कितने भी दिन रह सकते है. क्या यह रुपय का लोभ नही?

मै अमीर विश्वासीयो से पुछता हु, क्या परमेश्वर ने आपको दिये धन के प्रती आप अच्छे भंडारी हो? यह न सोचो कि आप न्याय से बच जाओंगे. परमेश्वर इसका हिसाब आपसे लेंगा. मजहबी डाकुओ को पैसा देना पाप है. जब आपके साथी विश्वासी तंगी मे हो तो आप इस मजहबी धंदा करनेवाली संस्था को अपना पैसा देते. गरीबो के सामने मुनगफली के दाने फेकने से आपकि जिम्मेदारी आपने पुरी कर ली ऐसा मत सोचो. अपने विवेक को आप समझा सकते किंतु परमेश्वर इसका लेखा लेंगा.

हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उस ने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए. पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्योंकर बना रह सकता है? हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें (1 यहुन्ना 3:16-18).

आप स्वय इसे जांचे

आपने कोट्टारकरा या चेन्नई मे होनेवाले टि.पि.एम के एक भी सम्मेलन मे भाग लीया होंगा तो आपको पता होंगा कि पास्टर्स को पलंग, बिछौना और दो बडी तकिया दि जाती है और वही विश्वासीयो को जमीन पर सोना पडता और ठिक से चटाइ भी नही मिलती. यीशु के बार मे हम पढते कि उसने हमे धनी करने के लीय खुद को कंगाल कर दिया. किंतु टि.पि.एम के पास्टर के साथ उल्टा है. प्रतीष्ठा के नाम पर ये लोग उन सुवीधाओ का आनंद उठाते जो ये यदि इस संस्था से न जुडते तो शायद इसक मजा ये कभी न उठा पाते. चेन्नइ मे पास्टर लोगो के खाने कि मेज विश्वासीयो से अलग होती है और यहा हर प्रकार के स्वदिष्ट और अच्छी क्वालीटी का भोजन परोसा जाता है.

इस स्थान मे कोइ छोटा सेवक ब्रदर और कोइ बडी सीस्टर भी प्रवेश नही करती जब तक कि वह जानी मानी हस्ती न हो. एक मजे कि बात बताता हु. जब कोइ एल्डर ब्रदर, पदउन्नत्ती कर पास्टर बन जाता, तो उसका तुरंत ही उसके भोजन का स्तर भी पास्टरो वाला हो जाता. खाने पिने के मामले मे भी ये कितने लालची है. बहुत से टि.पि.एम के सेवक खाने पिने के बंधन मे है और इन्हे भोजन कि लालसा पर कोइ जय नही.

उन का अन्त विनाश है, उन का ईश्वर पेट है, वे अपनी लज्ज़ा की बातों पर घमण्ड करते हैं,  और पृथ्वी की वस्तुओं पर मन लगाए रहते हैं (फिली 3:19).

प्रेरीत पौलुस इन झुठे सेवको को जानता था ओ संतो का भेष धरते थे. ये पेट्टु होते है और इन्हे पैसे बटोरना आता है. परमेश्वर इनका पाप कभी माफ नही करेंगा.

सेनाओं के यहोवा ने मेरे कान में कहा और अपने मन की बात प्रगट की, निश्चय तुम लोगों के इस अधर्म का कुछ भी प्रायश्चित्त तुम्हारी मृत्यु तक न हो सकेगा,  सेनाओं के प्रभु यहोवा का यही कहना है (यशा 22:14).

जब ये लोग प्रतीष्ठा, सीद्धता और सिय्योन कि बात करते है तो मुझे बहुर चीढ होती.

अमीर लोगो को आरामदायक कमरे और डाइनींग़ हाल मे स्पेशल भोजन खाता देखकर और गरीबो को जमीन पर सोता देखे और उन्हे कडी धुप मे भोजन के लीये लम्बी कतार मे खडा देख मेरा दिल दुखीत हो जाता.

मरकुस 12:42.43 मे हम देखते है कि यीशु ने धनवानो के बहुत से दान से उस गरीब विधवा के दो दमडीयो को अधीक मुलयावान ठाहराया. किंतु टि.पि.एम के सेवक के विशय क्या? इनके लीये तो धनवानो का अधीक पैसा अधी मुल्यवान होता है. इसीलीये तो धनवानो कि इतनी खतीरदारी होती है और उनके रहने के लीये विशेष कमरे होते. लुका 9:13,14 मे जब यीशु ने भीड को पास पांच रोटियां और दो मछली बाटी तो उसने पचास पचास के झुंड मे बैठने को कहा. क्या हम ये कह सकते है कि कोइ धनवान या नामी गीरामी मनुष्य उस भीड मे नही था?  विभीन्न दर्जे के लोग उस भीद मे अवशय होंगे किंतु यीशु ने बीना पक्षपात के उन्हे पचास-पचास के झुंड मे बैठने को कहा. टि.पि.एम के सेवक प्रधान प्रेरीत यीशु के कदम चिन्हो पर चल रहे ये हम कैसे कह सकते है. इस तरह का भेदभाव पैसो के लालच से फुट निकलता है.

मेरे प्रिय मित्रो, इन बातो के उपर आपकी राय क्या है? क्या ये लोग आपको सीद्ध बनायेंगे? संत पौलुस कुलुस्सियो 3:5 मे कहता है कि लालच मुर्ती पुजा के बराबर है. लालच लालच होता है फिर चाहे वो सुख का लालच हो या पदवी का या भोजन का या नाम-शान या धन का. प्रका 21:8 के अनुसार सारे मुर्तीपुजको का भाग आग कि झील मे होंगा. इस सारे तथ्यो को ध्यान मे रखते हुये आप इन लोभी लोगो के बीच से और इस लालची प्रणाली से बहार क्यो नही निकल आते. मेरे लेख का अंत करने से पहले मै आपको बेंगलोर के जेक पूनन के क्रिस्चीयन फेलोशीप चर्च मे एक दौरा कर आने कि सलाह देता हु. दान कैसे दे इसका सुंदर नमुना आप वहा देख सकते है. प्रभु आपको आशीश करे.

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