जो व्यवहार मे लाते उसी का प्रचार करो

पीछले सपताह गाडी चलाते समय एक कार जो मेरे पीछे थी वह मेरे बाजु कि राह पकडकर मेरे से आगे निकल गइ. एक सेकंड के लीये मुझे इसमे कोइ फरक नही पडा. किंतु इसके बाद इस कारवाले ने उसके आगेवाली गाडी से आगे जाने के लीये फिर अपनी राह को बदलकर वापस मेरी राह मे अपनी कार को मोड लीया और उसकी आगेवाली कार को ओवर्टेक किया. इस तरह आजु बाजु होते हुये अपने आगेवली गाडीयो को ओवरटेक करते हुये वह कार बहुत दुर निकल गइ. मेरा अनुमान है कि शायद वह किसी अपातकालीक स्थीती मे होंगा. आपतकालीक स्थीती मे इस तरह का व्यवहार हम सभी से अपेक्षीत है. किंतु जो घटना चेन्नइ मे हुइ उसने मुझे इस ट्राफीक वाली घटना कि याद ताजा करा दि. क्योकि चीफ पास्टर स्टीफन प्रचार समापत करने कि जलदी मे, वचनो के आपसी तालमेल को समझाने के बजाय, लगातार एक पर एक वचनो के रेफरेंस बोल रहे थे.

चेन्नइ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के संडे कि आराधना मे टि.पि.एम के चीफ पास्टर ने जो प्रचार किया उसपर मुझे टिपण्नी करने कि प्रेरणा हो रही है. उन्होने हबक्कुक 3:17-19 पर प्रचार किया. यदि मेरी गीनती ठिक है तो उन्होने इस प्रचार मे 44 वचनो का रेफरेंस दिया. रेफरेंस कि मेरी गीनती करने कि क्रिया के विशय गलत न समझे क्योकि मै सोचता हु कि एक अच्छे प्रचारक कि यह निशानी होती है कि वह कम वचन बोले और बोले गये वचनो को अच्छी तरह से समझाने का प्रयास करे.

लोगो को वह प्रचार करते जीसे वे खुद पालन नही करते

पास्टर स्टीफन मे हबकुक से यह कहकर अच्छी शुरुआत करी कि हमे हर परीस्थीती मे आनंदीत रहना चाहीये किंतु बहुत जल्दि वे राह से भटक गये. उसने जो स्पष्टीकरण दिया वह उनपर अच्छी तरह से लागु होता है. मेरा अनुमान है कि यदि हबक्कुक इधर मौजुद होता तो वह प्रचार के बीच मे खडा होकर चिल्लाता कि बंद करो! मेरे कहने का यह मतलब नही था. चलीये इनके द्वारा किये प्रचार पर गौर करते है.

  1. अंजीर के पेड का स्वभाव: न्यायीयो 9:11 यह पेड अच्छा और मीठा फल देता है. हबक्कुक ने कहा कि चाहे अंजीर के वृक्ष मे फल न लगे तौभी मै यहोवा मे आनंदित रहुंगा. पास्टर स्टीफन लोगो को सीखा रहे थे कि यदि लोग हमे अच्छा फल न दे तौभी हमे आंनदीत रहना चाहीये. जब लोग हमारे साथ अच्छे से व्यवहार नही करते तब भी हमे परमेश्वर ने आनंद मनाना चाहीये.

    • मेरी टिपण्णी: टि.पि.एम के कितने सेवक ऐसा करते है? मैंने ऐसे कितने सेवको को देखा है कि जो उनके अपेक्षीत व्यवहार उन्हे न मिलने पर लोगो को बुरा भला कहते है. एक बडी सेवक सीसटर जीनको लगता था कि विश्वासीयो ने उनके साथ अच्छा बर्ताव नही किया वह उनसे इतनी नाराज हुइ कि उन्हे जाते समय बिदाइ के दो शब्द भी कहे बीना पीछले द्वार से निकल गइ. इतनी कडवाहट रखनेवाले सेवक मिटींग मे बडे जोर शोर से स्प्रींग कि तरह उछलकर अन्य अनय भाशा मे भरते है. इनका विवेक इन्हे कैसे अनुमती देता? मुझे माफ करे! ये तो हबक्कुक 3:17-19 का पालन करते है.

  2. दाखलता का स्वभाव:न्यायीयो 9:13  दाखलता परमेश्वर के और मनुष्य के मन को प्रसन्न करती है. टि.पि.एम के सेवक परमेश्वर को कितना प्रसन्न करते है? ये लोग उपवास लेते (बडे बडे प्यालो मे ओट्स और जुस पीकर) और प्रार्थना करते है. किंतु क्या इस तरह के उपवास से परमेश्वर प्रसन्न होता है? यशा 58:3-7 पढे कि परमेश्वर लोगो से क्या चाहता है? Easy English Version, अंग्रेजी बाइबल का भाशंतर बडा हि रोचक है. यीर्मयाह 9:24 मे परमेशवर कहता है कि वह करुणा, न्याय और धर्मीकता से प्रिती रखता है.

    • मेरी टिपण्णी: टि.पि.एम मे न्याय कहा है? ये गरीएब विश्वासीयो और सेवको को दंड देते किंतु हत्यारो को आडे हाथ और न्याय प्रणाली को रीशवत देकर न्याधीक के फैसले को अपने हित मे मोडते. क्या इसे परमेश्वर को प्रसन्न करना कहते है? अपने पडौसीयो को सबसे ज्यादा तकलीफ देते. विश्वसनीय सुत्रो से मीली जानकारी के अनुसार इरंबुलीयुर मे इन्होने बाजु वाले कि जमीन पर गंदे पानी को बहाया क्योकि उसने इन्हे जमीन बेचने से इनकार कर दिया था. इसके पीछे इनकी मनसा थी कि वह व्यकती मजबुरन इस जमीन को सस्ते दामो मे इन्हे बेच कर वहा से चला जाय. क्या इस तरह से आप मनुष्य को प्रसन्न करते है?  उपर कही बाते चीफ पास्टर को मीले प्रकटीकरण के अनुसार है. अब हबक्कुक कि दृष्टीकोण से देखते है. उसने कहा “और न दाखलता मे फल लगे… तौभी मै यहोवा के कारण आनंदीत रहुंगा.” अक्षरीक तौर से उसका कहना था कि यदि दाखलता के पेड मे फल न आने से भी वह उदास न होंगा किंतु आनंद परमेश्वर मे मगन होयेंगा. दुसरे दृष्टीकोण से उसके कहने का अर्थ था कि यदि मनुष्य उसे प्रसन्न न करे तौभी वह परीस्थीतीयो को अपने उपर हावी न होने देंगा. क्या टि.पि.एम के सेवक ऐसा कह सकते है? एक सीस्टर ने मुझे बताइ कि एक विश्वासी के घर विसीटींग करने पर उसे वह सीर्फ 100 रुपये देती है. इस तर्ह के लोग परमेश्वर मे नही किंतु नोट के दाम मे मगन होते है.

  1. जलपाइ का स्वभाव:न्यायीयो 9:9 – ये अपनी चर्बी से परमेश्वर और मनुष्य का आदर करता है. परमेश्वर ओठो के आदर को नही परंतु दिल से आदर को चाहता है.
    • मेरी टिपण्णी: कितने सेवक कह सकते है कि वे दिल से परमेश्वर का आदर करते है? कितने सेवक अपने अगुवओ को आदर करते किंतु परमेश्वर के लीये उनके मन मे थोडा या जरा भी आदर नही. देश भर के सेवको और पास्टर्स कि मीटींग मे आप देख सकते है कि अधीकांश सेवक दर्शक कि तरह बैठे रहते. यदि हेड क्वाटर्स मे ये हाल है तो अपने अपने स्थान पर लौटने पर इनकी स्थीती कसे रहती होंगी? मनुष्य को आदर देना यह इनके शब्दकोश मे ही नही! ये मनुष्य को आदर नही देते लैन उनसे आदर कि मांग करते है. मैंने कितने नव युवक सेवको को अपने पिता और परदादा कि उमर के विश्वासीयो को बाइबल कि बेग और चप्प्ल पकडवाकर अपने पीछे चलाते देखा है. मैंने जवान सेवको को बढे बुजुर्गो से अपने हाथ पैर दबवाते देखा है. क्या इस तरह से परमेश्वर और मनुष्य का आदर करते है? जब हबक्कुक ने ये कहा कि जब जलापाइ के वृक्ष से केवल धोका पाया जाय, तो उसके इस कथन का क्या अर्थ था? मेरे अनुसार जब मनुष्य उसे आदर न करे तौभी वह परमेश्वर मे मगन रहेंगा. बहुत से टि.पि.एम के सेवक इस शेत्र मे असफल है. जब आप उन्हे अईया और पास्टर इन नाम से संबोधीत नही करते तो इनकी प्रतीक्रिया देखे. एक बार एक सेवक कि पदौनत्ती हुइ और वह ब्रदर से पास्टर बन गया. एक विश्वासी ने उन्हे हमेशा कि तरह ब्रदर कहकर बुलाया. इससे वह सेवक इतना क्रोधीत हुआ कि पुछ मत. इस तरह का बर्ताव करके ये सेवक मनुष्य से आदर न मिलने पर परमेश्वर मे कैसे मगन रह सकते है? पास्टर स्तीफन ने अपने प्रचार मे कहा कि हमे गरीबो कि का आदर करना चाहीये. क्या मै पुछ सकता हु कि ये लोग सम्मेलन के दिनो मे गरीबो का कितना आदर करते है? दुबइ के धनी विश्वासीयो के लीये विशेष कमरो को आरक्षीत करके रखा जाता है. मै पुछता कि जीसे ये व्यवहार मे नही लाते उसका प्रचार क्यो करते? यदि ये विभीन्न जात, भाशा और वर्ग के लोगो के साथ एक सरीका व्यवहार नही कर सकते तो गरीबो का आदर करते है यह हम कैसे मान ले? क्या लुका 14:13 मे जो बात यीशु ने कही उसे टि.पि.एम के अगुवे मानते है?

  2.  खेतो मे अन्न न उपजे (मेरी टिपण्नी):  मान लेते है कि जैसे टि.पि.एम के चीफ ने कहा कि खेत कलीसीया को और दिखाते है और फल परमेश्वर कि इच्छा करने का प्रतीक है. अपने इस प्रकाशण को स्थापित करने के लीये उसने मत्ती 7:21 का इस्तेमाल किया. जो मुझ से, हे प्रभु, हे प्रभु कहता है, उन में से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है. इसके बाद वाले बाइसवे वचन का इस्तेमाल बहुत से सेवक यह कहकर करते है कि चमतकार करनेवाले बाकी कलीसीया के लोग स्वर्ग मे नही जायेंगे. बात सही है लेकिन इसका यह मतलब तो नही कि हम चमतकारो को नजरंदाज करने लग जाये? फिर चीफ पास्टर ने 1 थिस्सलुनी 4:3 को कहा कि परमेश्वर ने हमे अशुद्ध्ता के लीये नही पर पवीत्रता के लीये बुलाया है. हम जानते है कि टि.पि.एम के अनुसार पवीत्रता का अर्थ है शादी नही करना. हम याकुब 3:17 मे पढते है कि जो ज्ञान उपर से आता है उसके आठ निशनीया है. सबसे पहले वह पवीत्र होता है.. फिर बाकी… इसका अर्थ है कि सारे गुण कि जड पवीत्रता है. अब ये बताइये कि [याकुब 3:17] मे वर्णीत कितने गुण टि.पि.एम के संतो मे दिखाइ पडते. पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है. और मिलाप कराने वालों के लिये धामिर्कता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है.

  3. भेड शालाओ मे भेड बकरीया न रहे (मेरी टिपण्णी): इसका अर्थ उन्होने बताया कि संतो कि संगती को छोड कर चले जाना. फिर के बार इनके घम्न्ड कि झलक हमे दिखाइ पडती है. इनके इस कथन का अर्थ क्या है? टि.पि.एम के सेवक संत है और कोइ भी इनकी संगती छोडकर न जाये. वैसे इन्हे सत कहकर किसने इस बात कि पुश्टी कि है? क्या परमेश्वर ने इन्हे संत कहा कि ये इनकि अपने खुद कि बढाइ है?

  4. न पशुशाला मे गाये बैल हो (मेरी टिपण्णी): इस प्रचार मे कहा गया कि गाय बैल का अर्थ कष्ट और परीश्रम. अपने हित के लीये अर्थ लगाने मे इनहे कौशल्य हासील है. अब मै यह कह सकता हु कि गाय बैल सीर्फ परीश्रम नही करते किंतु वे अपने स्वामी के लीये दुध और अन्य सामग्री भी देते है. हबक्कुक का कहना था कि गय बैल से यदि मुझे दुध और अन्य सामग्री न मिलने पर भी मै यहोवा मे मगन रहुंगा. कुछ इने गीनो को छोडकर टि.पि.एम के अंधीकाश सेवक ऐसा नही कह सकते. ऐसे कितने सेवको का उदाहरण मै आप्को दे सकता जीन्हे उपयुक्त भोजन पानी न मिलने पर वे इसकि बडी कहानी बना सकते. बहुत से बडी सीस्टर्स को बीना पानी मिलाये दुध हर सुबह और शाम को एक बडे कप मे मिलना उनकी चाहत है और छोटी सीस्टर्स को एक कप चाय या काफी मे संतुष्ट होना पडता है. ऐसे कितने बडे पास्टर और एल्डर ब्रदर है जीन्हे तवे से उतरी गरम रोटी और गरम चावल चाहीये. यदि इनका खाना गुनगुना भी हो गया तो ये लोग ऐसा चिल्लाने लगते मानो पहाड तुट गया हो. दुख कि बात है कि बहुत से सेवको का पेट इनका इश्वर है (फिली 3:19). टि.पि.एम के शुरुआती दिनो मे कुछ लोगो ने तंग परीस्थीतीयो को खुशी खुशी सह लीया था किन्तु अब यह संस्था सुख विलास भोगनेवाली संस्था है.

निश्कर्ष

अपने शब्दो को समाप्त करने से पहले मेरा सुझाव है कि टि.पि.एम के चीफ पास्टर स्टीफन टी.पे.एम के सारे सेवको का पुनरवास करे. उन्हे सिखाये, सुझावे दे कि दुसरो के लीये अच्छा नमुना बने .

बाइबल से अनजान टि.पि.एम के विश्वासीयो से मेरा आग्रह है कि वे टि.पि.एम कि नज़र से चिजो को देखना छोडकर परमेश्वर कि आत्मा कि मनसा के अनुसार बाइबल पढे. भेडो कि नाइ अंधे होकर किसी के पीछे भी मत हो लीया करे. हमारी बातो पर यकिन नही आता तो टि.पि.एम मे सेवक बनकर कुछ महीने या साल बिताकर अंदर क्या होता है देखे. तुम सच्चाइ को जानोंगे और सत्य तुम्हे आजाद करेगा. चमकनेवाली हर वस्तु सोना नही होता. (यशयाह 5:20) ऐसे लोग है जो भले को बुरा और बुरे को भला कहते है. जो उजीयाले को अंधीयारा और अंधीयारे को उजीयाला ठहराते है. वे कडवे को मिठा और मिठे को कडवा कहते है. किंतु बहुत जल्द वे दुखी हो जायेंगे. मेरे प्रिय टि.पि.एम के अनुयाइयो ढाडस के साथ खडे हो जाओ, और जो गलत है उसे गलत कहना सीखे और जो सही हो उसे सही कहे. कम से कम हम जो कह रहे उसका विश्वास कर ले. भले और बुरे के बीच अंतर करने के लीये खुदा आपके अंधेपन से आपको चंगाइ दे.

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