केटेकिस्ट – पौल रमाकुट्टी

पिछले लेख मे हमने अल्वीन कि धुन पर टि.पि.एम का नाच कैसे आरंभ हुआ था इसपर गौर किया था। अल्वीन ने शेकर्स संस्था के ताल से ताल मिलाना आरम्भ किया था, और टि.पि.एम संस्था, मदर एन ली के संगीत पर थिरकने लगी। यदि पास्टर रमाकुटटी ने अल्वीन को चीफ पास्टर नही बनाया होता, तो आज टि.पि.एम का संगीत थोडा मधुर हुआ होता। किंतु दुर्भागयवश ऐसा न हुआ। इसलीये जब भी मै टि.पि.एम कि पारी के शुरुआती बल्लेबाजो पर विचार करता हु, तो मेरे मन मे ये सवाल बार-बार उठ आते है। क्यो पास्टर रमाकुट्टी ने अल्वीन को उप कपतान के पद पर नियुक्त किया? हैरत कि बात है कि पास्टर रमाकुट्टी, जीनके विशय यह समझा जाता है कि वे परमेश्वर के बहुत करीब थे, और पर्वत कि चोटी पर इन्हे टि.पि.एम के मिलापवाले तम्बु के स्थापना कि योजना दिखलाइ गई थी, इतने महान पुरुष को परमेश्वर ने टि.पि.एम के अगले अगुवे को नियुकत किसे करे इसकि जानकारी क्यो नही दि? हमे तो हमेशा से यह बताया जाता है कि, हर चिफ पास्टर को परमेश्वर पहले ही बतला देता है, कि अलगा चीफ पास्टर कौन होंगा? तो फिर रमाकुट्टी को यह बात क्यो नही बतायी गयी? क्या उनके बाद आने वाले सभी चीफ पास्टर रमाकुट्टी कि तुलना मे परमेश्वर से ज्यादा करीब थे? क्या पिछले सभी चीफ पास्टर लोग, प्रथम चीफ पास्टर से ज्यादा महान थे? क्या रमाकुट्टी ने यह कदम गलती से उठाया था? या फिर रमाकुट्टी को इस बात का ज्ञान था कि वह अलवीन को पेंटीकोस्टल बटालीयन का कप्तान क्यो बना रहा है? यदि रमाकुट्टी ने यह कदम सोच समझकर ऊठाया था, तो उसकी मनसा क्या थी? इन सारे सवालो के उत्तर को खोजने के लीये, रमाकुट्टी कि जीवनी को कटघरे मे पुछताच के लीये बुलाना ही पडेंगा ।

रमाकुट्टी कि नीव

दि पेंटीकोस्टल मिशन चर्च के संस्थापक पास्टर पौल रामनकुट्टी कि जीवनी को पढने से (अध्याय 2), मे लीखा है कि मसीह धर्म को अपनाने के बाद, पास्टर पौल रामाकुट्टी के मन मे केटेकिस्ट (catechist) बनने कि इच्छा हुई (English प्रकाशन देखे)। उनके मन कि यह इच्छा सुनके, एंगलीकन (Anglican) चर्च के बीशप ने रामनकुट्टी को कोट्टायम (केरला) के CMS सेमीनरी मे बाईबल कि पढाई करने को भेजा । थोडी छान बीन करने से आपको यह पता चलेंगा कि केरला कोट्टायम कि CMS बाईबल सेमीनरी का दुसरा नाम “Orthodox Theological seminary Kottayam Kerala India है ।

इधर दो बाते ध्यान देने लायक है।

1) पौल रमकुट्टी कि इच्छा एक केटकिस्ट बनने कि थी ।

2) उनके इस सपने को पुरा करने के लीये उन्हे ओर्थोडॉक्स थीयोलोजीकल ट्रेनींग कोलेज मे भेजा गया?

स्मरण रखे कि सम्राट कोंस्टेंटाइन के दिनो मे ओर्थोडोक्स कलीसीया, केथोलीक कलीसीया का पुर्वी हिस्सा हुआ करती थी। इन दोनो कलीसीया के बीच फुट उपदेशो के मतभेद के चलते नही हुइ थी। यह फुट छोटे-मोटे मसलो और अभीमान के चलते हुइ थी।

केटकिस्ट शब्द का मतलब क्या है? ओक्स्फोर्ड दिकशनरी के अनुसार, केटकिस्ट मसीही धर्म कि शीक्षा देनेवाला शीक्षक होता है, विशेष कर वह केटीकिस्म कि शीक्षा देता है। इस ओंलाइन डिकशनरी के हिसाब से इस शब्द का इस्तेमाल सोलावी शताब्दी से होने लगा था। आपको बतला दे कि सोलावी शताब्दी रीफोर्मेशन का युग था (रीफोर्मेशन = केथोलीक से प्रोटेस्टंट लोगो का अलग होना)। इन दिनो केथोलीक रीफोर्मेशन या जवाबी-रीफोर्मेशन भी हुआ था। जवाबी रीफोर्मेशन का अर्थ कि जैसे प्रोटेस्टंट लोगो ने केथोलीक चर्च को फोडा और वे उसमे से बहार निकल आये वैसे केथोलीक कलीसीया ने भी इसके जवाब मे जो मुहीम चलाइ थी उसे जवाबी-रीफोर्मेशन कहते है। खैर इस जवाबी-रीफोर्मेशन को हम बाद मे देखेंगे। हम अपना ध्यान केटकिस्ट शब्द पर दोबारा लगाये।

पौल रमकुट्टी एक केटकीस्ट

जैसे हमने पहले बताया कि रमकुट्टी को एक पेशेवर केटकिस्ट बनने कि तमन्ना थी। उनकी जीवनी मे लीखा है कि उनके मित्र उन्हे बडे आदर से पौल केटकिस्ट कहा करते थे।

इस केटकिस्ट शब्द का मुल अर्थ समझने के लीये हमे रोमन केथोलीक कलीसीया कि सहायता लेंनी पडेंगी। वेटीकन कि अर्थात रोमन केथोलीक कलीसीया कि अधिकारीक वेबसाइट के अनुसार (click here), “केटेकिस्ट (catechist) केथोलीक विश्वास और उपदेशो और परमपराओ को सीखानेवाला शीक्षक होता है. वह केथोलीक सन्यासीयो से भीन्न होता है. वह स्त्री, पुरुश, जवान बुढा, शादी शुदा और कुवारा भी हो सकता. वह सीर्फ केथोलीक चर्च मे दिखाई दे ऐसा जरुरी नही. वह नई कलीसीया को स्थापीत करने के लीये विशीष्ट रुप से तैयार (trained) किया हुआ होता है.” अधीक जानकारी के लीये वेबसाइट देखे या फिर इस लेख का अंग्रेजी भाशंतर देखे।

अब आप बताये कि रमाकुट्टी ने किस तरह कि कौशलयता या पेशवरता प्राप्त कि होंगी? यह बात साफ है उसे नइ कलीसीया का निर्माण कैसे करते है इसमे प्रशीक्षण मिला था। अब सवाल यह उठता है कि क्या पोल रमाकुट्टी ने नइ कलीसीया कि स्थापना कि? हा! करी तो सही! उसने सीलोन पेंटीकोस्टल मीशन कि स्थापना कि। किंतु यह नयी स्थापित कलीसीया कैसे थी? आप कहोंगे कि यह नयी स्थापित सी.पि.एम कलीसीया एक पेंटीकोस्टल प्रोटेस्टंट कलीसीया है।

तो यह छानबीन यही खतम होती है। इस फाइल को यही बंद कर देते, क्योकि भले ही रमाकुट्टी एक पेशेवर केटेकिस्ट था, जीसे केथोलीक कलीसीया स्थापना करने मे कौशल्य हासील था, तौभी उसने एक प्रोटेस्टंट कलीसीया कि स्थापना कि। किंतु एक मिनट ! मेरा आखीरी सवाल ! क्या रमाकुट्टी ने सचमुच मे एक प्रोटेस्टंट कलीसीया कि स्थापना कि? या फिर एक केथोलीक/ओर्थोडॉक्स ? नीचे टेबल मे देखे और स्वय जांच करे। हम आपको बतायेंगे कि टि.पि.एम एक ओर्थोडॉक्स/ केथोलीक कलीसीया है, प्रोटेस्टंट नही! यह एक सफेद झुठ था जीसे हमे बार बार सुनाया गया कि यह कलीसीया प्रेरीतो के उपदेश पर बनाइ गइ है। नीचे दिये टेबल से स्वय जांच कर ले, कि बाइबल मे दिये प्रेरीतो के उपदेश पर यह कलीसीया स्थापित है कि रोमन केथोलीक कलीसीया कि बुनीयाद पर इसकी स्थापना हुइ है। टेबल मे पहले कोलम मे आप टि.पि.एम के सेवको के जीवन शैली, नियम, कानुन और परमपराओ को देखे। फिर दुसरे कोलम मे इनकी मुल उत्पती का स्तोत्र अर्थात केथोलीक कलीसीया कि कानुन कि पुस्तक जीसे कोड ओफ केनन Code of Canon Laws कहते है, उससे इसकी तुलना करे। केथोलीक कानुन कि पुस्तक “कोड ओफ कानुन” एक्लौती ऐसी पुस्तक है, जीसमे हमे टि.पि.एम के सारे निअम और परमपराये लीखीत रुप से मिलेंगे। टि.पि.एम के ये नियम आपको बाइबल मे नही मिलेंगे।

पौल रमाकुट्टी और जवाबी रीफोर्मेशन

क्या रमाकुट्टी एक ओर्थोडोक्स/ केथोलीक मिशनरी था, जीसे केथोलीक उपदेश के उपदेशो और नियमो पर नयी कलीसीया स्थापित करने के लीये भेजा गया था? एक वेबसाइट के अनुसार, “सेकंड वेटीकन काउनसील के दिनो से केथोलीक पादरीयो और आम जनता के बीच इस तरह के विचार उठने लगे थे कि प्रोटेस्टंट लोगो को केथोलीक कलीसीया कि तरफ आकर्षीत करने के लीये, हमे उनके समान बनना पडेंगा । हमे अपने कलीसीया को इस तरह से सजाना पडेंगा कि वे केथोलीक कि बजाये, प्रोटेस्टंट दिखाइ पडे। हमे अवश्यकता से अधीक समान को निकालना पडेंगा और उन्हे आधुनीक और समय के अनुसार ढालना होंगा। इस तरह के विचार भी उठने लगे कि, केथोलीक संगीत और धुन के स्थान पर प्रोटेस्टंट धुने और संगीत का इस्तेमाल करना पडेंगा. तभी हम प्रोटेस्टंट लोगो को अपनी और आकर्शीत करने पायेंगे। यदि हम केथोलीक आराधना, धुप, अगरबत्ती, और घंटीयो को हटा दे, तो अवश्य हम प्रोटेस्टंट लोगो को आकर्षीत कर सकेंगे ।……. साफ कहे तो ऐसा करने के लीये सेकंड वेटीकन काउनसील ने कभी कोइ आज्ञा नही दि थी, न उसने ऐसा सपने मे सोचा था। इस तरह का चलन तो सेकंड वेटीकन काउनसील के बाद आया, लेकीन इसके लीये वेटीकन ने अधीकारीक कोइ प्रस्तापना नही किया था। मै सोचता हु कि यह अपने आप हुआ और होता गया…” फिर इन शब्दो को कहने के बाद इस वेब्साइट का लेखक इस पद्धती “contextualization” का विरोध करता है। कहने का तापर्य यह है कि इस वेबसाइट का लेखक हमे बतला रहा कि इस तरह का चलन केथोलीक के बीच हुआ करता था कि अगरबत्ती, मोम्बती, घंटीया और अन्य केथोलीक दिखाइ देनेवाली वस्तुओ का को चर्च से हटाकर चर्च को प्रोटेस्टंत चर्च कि तरह बनाये। इस तकनीक (जवाबी-रीफोर्मेशन) का इस्तेमाल कर लोगो को मुर्ख बनाकर यह विश्वास दिलाया गया कि यह केथोलीक नही किंतु प्रोटेस्टंट कलीसीया है। क्या टि.पि.एम के साथ भी यही हुआ? हम नही जानते। किंतु उपर दिये सबुतो के चलते इसकी सम्भावना बहुत अधीक हो जाती।

हमारे पिछले लेख के द्वारा हमने आपको बताया था कि पौल रमाकुट्टी ने प्रोटेस्टंट कलीसीया के “विश्वास के द्वारा धर्मी ठहरने” कि सच्चाइ को तोड मोडकर विश्वास को अनंतकालीक जीवन प्राप्त करने के लीये इस्तेमाल किये जाने से मोडकर उसक इस्तेमाल भौतीक वस्तुओ के इस्तेमाल के लीय किया । इस लेख को इधर ( here ) इस उपशीर्षक्र के अधीन देखे – “बुनीयादि वचन के साथ खिलवाड.”.

निष्कर्ष:

क्या आप टि.पि.एम के सेवक और विश्वासी अब भी यह सोचते हो कि पौल रमाकुट्टी ने इस टि.पि.एम कलीसीया कि स्थापना, इसके उपदेश, इसकी कार्य प्रणाली को परमेश्वर के दिये प्रकाशन से बनाया? हम पर्दाफाश कर सब कुछ आपके आखो के सामने ले आये है। टि.पि.एम कलीसीया वेश्या केथोलीक कलीसीया कि बेटी है। आप स्वय निर्णय ले कि टि.पि.एम कि जीवन शैली, परमेश्वर का प्रकाशन है, या फिर इस कलीसीया कि स्थापना रमाकुट्टी कि केथोलीक ओर्थोडॉक्स कलीसीया से पाइ शीक्षा पर कि गइ है? क्या टि.पि.एम एक प्रोटेस्टंट कलीसीया है, या फिर बाबुल कि वेश्या कि बेटी है?

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