इक्किसवी सदि के मुसा – टि.पि.एम के पास्टर्स?

बहुत समयो के पहले जब कभी परमेश्वर को इस्रायेलीयो से कुछ बात कहनी हुआ करती थी, तब परमेश्वर उस बात को मुसा को अपने पास बुलाकर कह दिया करता था कि वह जाकर इस्रायेलीयो को परमेश्वर का वचन बताये। फिर मुसा उसे लोगो को कुछ इस तरह से बताया करता था कि ये परमेशवर के वचन है। इसलीये जो कोइ मुसा से उलटा सवाल किया करता था, या फिर जो कोइ मुसा के शब्दो का इनकार करता था तो उसपर परमेश्वर कि और से भारी दंड आता था।

आजकल के पादरी इसी परीछेद को व्यवस्था करके सीखाते  है। ये लोग इस परीछेद का इस्तेमाल कर मजा कर रहे है। ये लोग सिखाते है कि ये पास्टर्स अपनी-अपनी कलीसीयाओ मे मुसा कि तरह अधीकार रखते है। जैसे मुसा कि भुमीका थी वैसे इनकी भी है! ये जनता के प्रशासनकर्ता है! लेकिन क्या इनका ऐसा कहना सही है?

अपनी अपनी कमर कस लो । हम इस शर्मनाक रीती कि जांच करनेवाले है, जीसके द्वारा आज के पास्टर परमेश्वर के लोगो को अपने मनघडत राज्य के भीतर बांधने कि फिराक मे रहते है.

वास्तवीक परीस्थीती

आपको क्या लगता है, कि पास्टर्स और अन्य कलीसीया के अगुवे इसको क्यो सीखाते है? ये लोग इस परीछेद का इस्तेमाल क्यो करते है? क्या इसलीये कि ये लोग परमेश्वर के वचन मे जो दिखाइ देता उसका पालन करते है? मरे हिसाब से इसकि संभावना नही के बराबर है! अधीकतर मामलो मे ये अगुवे इस अंधकारमय मार्ग पर इसलीये चलते है क्योकि वे खुद झुठी अध्यातमीक शीक्षा और प्रशीक्षण के द्वारा भरमाये गये होते है। ध्यान रहे कि राज्य, अधीकार, सामर्थ और नियंत्रण “ सांस्थायीक कलीसीयाओ ” कि बुनीयाद है। इस संस्थायीक बुनीयाद को 1500 वर्ष पहले स्थापित किया गया था। इस भ्रष्ट, क्रुर बुनीयाद पर अंधीकाश कलीसीया के नेता भ्रम मे है। कुछ मामलो मे, अपनी उन झुठी सीखावट के कारण और अपने इस विश्वास के कारण कि यह पवीत्र शास्त्र के अनुसार है ये लोग इस मत पर ठोस रीती से बने रहते है। कितने लोग इस पिशाची बुलबुले मे यह सोचते है कि परमेश्वर ने इस तरह से सेवा करने के लीये इन्हे बुलाया है।

उन दिनो कि सच्चाइ क्या थी?

पुरानी वाचा के समयो मे एक चुने हुये झुंड को परमेश्वर के लोगो के बीच से अलग किया गया था कि वे परमेश्वर कि सेवा कर सके। ये परमेश्वर के नाम मे लोगो से बात करने के लीये प्रवकता हुआ करते थे।

और याजक भूल से पाप करने वाले प्राणी के लिये यहोवा के साम्हने प्रायश्चित्त करे;  सो इस प्रायश्चित्त के कारण उसका वह पाप क्षमा किया जाएगा (गीनती 15:28).

इसमे कोइ दो राय नही कि पुरानी वाचा के अंतर्गत (मृत्यु कि सेवकाइ जीसके अक्षर पत्त्थरो पर खोदे गये थे) परमेश्वर ने आम लोगो के बीच से एक विशीष्ट पादरी वर्ग का निर्माण किया था।  इस वर्ग के सदस्य परमेश्वर के वास किये जानेवाले तम्बु और इस्रायेलीयो के बीच मे खडा हुआ करते थे। ये सुदंर वस्त्रो का परीधान किया करते थे जो परमेश्वर कि बाकि प्रजा से इन्हे भीन्न दर्शाते थे। ये लोग वह कार्य करते थे जीसे  वे लोग नही कर सकते थी जीनका अभीशेक नही किया गया। इनके पद थे। ये लोग परमेश्वर के द्वारा ठहराइ रीतीयो का पालन करते थे।

अब नया दिन निकल आया है 

जनता और पादरी वर्ग मे इस तरह के अंतर को यीशु ने क्रुस पर सदा के लीये मिटा डाला है। जब कानुनी सरंक्षक ने हमे यीशु के हाथ मे सौप दिया तभी से ये प्रथाये और भेद मिटा दिये गये। अब परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास ने व्यवस्था के कामो से मिलनेवाली धार्मीकता का स्थान ले लीया है। अब परमेश्वर का हर बच्चा एक याजक है।  इस पुरी पृथ्वी पर हर व्यक्ती जो यीशु के लहु से धर्मी ठहराया जाता है वह परमेश्वर का याजक ठहरता है – और हमें एक राज्य और अपने पिता परमेश्वर के लिये याजक भी बना दिया; उसी की महिमा और पराक्रम युगानुयुग रहे. आमीन. (प्रका 1:6) | यीशु के पीछे चलनेवाला हर एक व्यकती इस सेवकाइ मे प्रदारपन करता है। परमेश्वर के वचन के अनुसार ऐसा कोइ चेला नही (पीछे चलनेवाला) जो सेवक न हो (जीसके लीये कोइ सेव न हो)। तुम भी आप जीवते पत्थरों की नाईं आत्मिक घर बनते जाते हो, जिस से याजकों का पवित्र समाज बन कर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्राहणयोग्य  हों। पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिस ने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो (1 पतरस 2:5,9)।

सुधार कि घडी आ पहुची है

भवीश्यवक्ताओ ने जीस समय के विशय कहा था, उस समय कि शुरुआत हो चुकी है। नइ वाचा (जो पेन और श्याही से नही किंतु पवीत्र आत्मा के द्वारा हमारे मनो मे लीखी गइ है) नइ व्यवस्था है। हम अब दास्तव के गुलाम नही रहे। समय पुरा हुआ। परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा,  जो स्त्री से जन्मा,  और व्यवस्था के आधीन उत्पन्न हुआ ताकि व्यवस्था के आधीनों को मोल लेकर छुड़ा ले, और हम को लेपालक होने का पद मिले (गलाती 4:4-5)। जंगल कि कलीसीया के स्थान को अब मसीह कि कलीसीया ने ले लीया है। इस्रायेल राष्ट्र चला गया, मंदिर लोप हो गया, याजक पर नही रहा, लेवी नही रहे, और मुसा कि व्यवस्था के सबंध मे लीखा है;

नई वाचा के स्थापन से उस ने प्रथम वाचा को पुरानी ठहराई,  और जो वस्तु पुरानी और जीर्ण जो जाती है उसका मिट जाना अनिवार्य है (इब्रा 8:13).

इसी रीति से उस ने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो (1 कुरीं 11:25,  लुका 22:20).

मसीह ने स्वतंत्रता के लिये हमें स्वतंत्र किया है; सो इसी में स्थिर रहो, और दासत्व के जूए में फिर से न जुतो (गला 5:1).

यीशु एक उत्तम वाचा कि जमानत ठहरा  (इब्रा 7:22, इब्रा 9:11-12, इब्रा 8:2-8, इब्रा 9:15, इब्रा 10:9-10, इब्रा 12:24)

जिस ने हमें नई वाचा के सेवक होने के योग्य भी किया, शब्द के सेवक नहीं वरन आत्मा के; क्योंकि शब्द मारता है, पर आत्मा जिलाता है (2 कुरी 3:6)

और आज तक जब कभी मूसा की पुस्तक पढ़ी जाती है, तो उन के हृदय पर परदा पड़ा रहता है. परन्तु जब कभी उन का हृदय प्रभु की ओर फिरेगा, तब वह परदा उठ जाएगा (2 कुरी 3:12-16).

इसके बावजुद हम क्या देखते है?

आज के संस्थायीक कलीसीयाये नही चाहती कि नइ वाचा, पुरानी वाचा को बदले । इस कारण ये लोग पिछले दो हजार वर्षो से “पुरानी वाचा के पुराने दाखरस को” “नइ वाचा के नइ कुप्पीयो मे” उंडेल रहे है। ये लोग पुरानी वाचा के पुराने वस्त्रो पर नई वाचा के नये कपडो का पैबंद लगाते आ रहे है। इसका परीणाम हमेशा विनाशकारी ही रहा है। कलीसीया के अगुवे पुरानी वाचा कि सोच को छोडना नही चाहते है। ये लोग दोनो वाचाओ के उत्तम भागो को इस तरह एक साथ सील देते है कि दोनो ही अब एक दुसरे को पुरी तरह से खारीज कर देती है।

पुरानी वाचा के याजकपद को हर विश्वासी के याजकपद से बदलने कि बजाये हमे इन “संथायीक कलीसीयाओ” मे एल्डर, पास्टर्स और आदि तरह के विभीन्न पद दिखाइ देते है। इन पदो ने पुरानी वाचा के लेवीयो और याजको का स्थान अपना लीया है। जब भीड “चर्च को जाती है” तो वे मुसा के दिनो के लोगो कि तरह पुरानी वाचा कि मानसीकता के साथ चर्च को जाती है। पवीत्र आत्मा ने पास्टर मे मन मे संदेश दिया कि नही इसकी परवाह किसे बगैर, ये लोग इस इंतजार मे बैठे रहते कि पास्टर पर्वत कि चोटी पर जाये, और परमेश्वर से प्रकाशण लेकर इनके पास आये। इसके बाद हर रवीवार को (मानो वह पर्वत से नीचे आया हो), मंच पर खडे हो कर “परमेश्वर का संदेश” (ऐसा समझा जाता) सुनाता है। फिर सारे लोग श्रोताओ कि तरह बीना प्रशन्न किये अपनी मुंडी हिलाते है। परमेश्वर कि आवाज को स्वंय सुनने के बदले, इन्होने नइ वाचा के सत्य को यीशु के पुर्व के परीस्थीती के हाथो बेच डाला है। लोग यह सोचकर चर्च को जाते कि मानो वे पुराने नियम के दिनो मे जी रहे है। इनकि सोच के अनुसार ये परमेश्वर के मंदीर या मिलाप वाले तम्बु मे उसकी आवज सुनने या उससे मिलने जा रहे होते। किंतु ये भुल जाते कि हम नये नियम के लोग परमेश्वर के मंदीर है (1 कुरी 3:16, 2 कुरी 6:16, इफी 2:21, इब्रा 3:6)। इसे स्वीकार करने के बदले ये पुराने मार्ग को अपनाना बेहतर समझते है।

इनके ऐसे मन स्थीती देखकर ऐसा लगता है कि परमेश्वर का वचन पढते समय इन लोगो कि आख पर परदा पडा रहता है। कइ लोग इस वचन पर विश्वास नही करते कि परमप्रधान हाथ के बनाए घरों में नहीं रहता,  जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्तुओं को बनाया,  वह ….. हाथ के बनाए हुए मन्दिरों में नहीं रहता. न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है (प्रेरीत 7:48, प्रेरीत 17:24-25) । इन्हे देख ऐसा लगता है कि ये लोग अनुग्रह मे न बढे और न आत्मा मे इनकी बढती हुइ। ये व्यवस्था कि तरफ पीछे मुडे और बढने कि बजाये इनकी घटती हुइ है। ये लोग निर्बल और निकम्मी आदि शीक्षाओ कि और मुडे हुये है। इनका व्यवहार इस तरह से है कि मानो यीशु कि मृत्यु एक कालपानीक कथा है और कलवरी मानो एक ख्वाब है.  

मसीहत को माननेवाले कइ लोग परमेश्वर कि योजना अनुसार बनाये परीवार का भाग नही है। वे अपने दिनागी कलपना के नकक्षे के अनुसार संस्था कि स्थापना करते और पुराने और नये के मीश्रण के साथ परमेश्वर के सम्मुख आते हैऔर इसे ये स्थानीय कलीसीया कहते है। स्थानीय संस्थायीक कलीसीयाओ कि विचारधारा कुछ ऐसी है और यह बहुत दुखदाइ है। निर्बल और निकम्मी आदि शीक्षाओ को पकडे रहने के इस प्रत्यक्ष प्रदर्शन से हम और क्या निष्कर्श निकाले? इनके स्थान मे मसीह कि म्रुत्यु से प्राप्त होनेवाली आशीशो और हमे मिले मोल के प्रती इनकी दुरलक्ष्यता के इनके रवैये को देख हम इनके विशय और क्या निष्कर्श निकाले?

क्रुस कि बलीदान का लाभ बस इतना ही !!

वर्तमान के स्थानीय संस्थायीक कलीसीया को देखकर, ऐसा लगता है कि मसीह के मृत्यु से सीर्फ भेड बकरीयो को ही फायदा मीला है । क्रुस कि मृत्यु से बस इतना ही हुआ कि बलीदानो कि अब जरुरत नही रही! इन प्राणीयो को बांध के रखना और उन्हे काटना बंद हुआ ! इनके व्यवहार देखकर ऐसा लगता है कि क्रुस कि म्रुत्यु के कारण गाय बैल जी सकते है!  किंतु इसके अलावा,  इन स्थानीय संस्थायीक कलीसीयाओ को देखने से लगता है कि ज्यादा कुछ नही बदला है।

लेख का स्तोत्र: Wicked Shepherds

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